राज on Nostr: कवषऐलूष। ऐतरेयब्राह्मण पं॰२ ...
कवषऐलूष। ऐतरेयब्राह्मण पं॰२ अ॰३ ख॰१ सायणभाष्य। दास्याः पुत्रः इत्युक्तिरधिक्षेपार्थः। कितवः द्यूतकारः तस्माद् अब्राह्मणोऽयम्। ॰। इमं कवषं देवाः सर्वेऽपि विदुः विजानन्त्येव। अतोऽस्य कितवत्वादिदोषो नास्ति॥ अर्थात ये सब गालियाँ द्यूतक्रीडा के कारण। यह आक्रोश अथवा निन्दार्थ शब्द प्रयोग काशिका ६॰३॰२२ पुत्रेऽन्यतरस्याम् तथा २॰२॰६ नञ की महाभाष्य कैयट व्याख्या में विदित हैं॥ ब्रह्मपुराण गौतमीमाहात्म्ये अ॰६९ सू॰२। पैलूष इति विख्यातः कवषस्य सुतो द्विजः।
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2025-07-16 04:38:00 UTCEvent JSON
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